तैराकों को स्वयं को Demotivate करने वाले विचार को छोड़ने की जरूरत है

इसमें कोई संदेह नहीं है की एक सफल तैराक को पोडियम तक जाने तक का सफ़र उसके मानसिक धैर्य के साथ ही संभव हो पाता है| उनके रास्तो में काफी सारे वर्कआउट होते है जो तैराको की मानसिक स्तिथि की कड़ी परीक्षा लेता है कभी कभी तैराको को लगने लगता है की उनके लिए ये काम असंभव है और इससे ज्यादा अब आगे नहीं हो पायेगा लेकिन यही वो जड़ है जिसपे एक बार काबू पाने के बाद तैराक अपने सफलता से सायद कुछ की इंच दूर रहता है लेकिन अगर इस चीज़ से तैराक हार मान जाता है तो वही सफलता उससे इतनी दूर हो जाती है की फिर सायद दोबारा पाना सच में असंभव ही होता है| तैराकों को स्वयं को हराने के विचार को छोड़ने की जरूरत है|

नीचें 7 ऐसे स्वयं को हराने वाले विचार दिए गये है जिनको छोड़ने की जरूरत है|

  1. “यह ऐसा ही है, और यह कभी नहीं बदलेगा।”
  2. “यह इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए”
  3. “मैं पहली बार में विफल रहा, यह होना नहीं चाहिए”
  4. “लोग कहते हैं कि ऐसा नहीं किया जा सकता है, तो जाहिर है मैं यह नहीं कर सकता।”
  5. “फ़ास्ट समय जो मैंने अभ्यास में किया था वो नहीं माना जायेगा”
  6. “वो तैराक मुझसे अच्छा है लेकिन मैं क्यों नहीं?”
  7. “यह निराशाजनक है।”

यदि यह प्राप्त करने के लायक है, तो यह चुनौतीपूर्ण होगा। हो सकता है की असंभव के पास हो, लेकिन यदि आप तैराकी में कुछ हासिल करना चाहते हैं, और उन जल्दी सुबह की ट्रेनिंग की तुलना में हाँ, यह मुश्किल तो है। और वह ठीक भी है।

स्थिरता, रहने के लिए प्रेरित, अपने आप ईमानदारी से मूल्यांकन कर – – अंत में आप उन लक्ष्यों का पीछा करते हुए की प्रक्रिया में खुद के बारे में कहीं अधिक सीखना होगा की तुलना में आप संभवतः कल्पना कर सकते हैं, और हालांकि कि स्वर्ण पदक अपने गले में शानदार लग रहा है, प्राप्त करने की प्रक्रिया माहिर कुछ अद्भुत सभी का सबसे संतोषजनक होगा।

अंत में आप उन लक्ष्यों का पीछा करते हुए की प्रक्रिया में खुद के बारे में कहीं अधिक सीखना होगा। – स्थिरता, प्रेरित रहने के लिए, अपने आप से ईमानदारी- आप संभवतः कल्पना कर सकते हैं। और कि स्वर्ण पदक अपने गले में शानदार महसूस होगा। कुछ अद्भुत प्राप्त करने की प्रक्रिया के बाद का रिजल्ट सबसे संतोषजनक होगा।

महत्वपूर्ण घटक यहाँ है :- विफलता की सराहना करने के लिए सीखना। – सबक अपने स्विमिंग लक्ष्यों की ओर के रास्ते पर सीखा जा सकता है। –

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About Sanuj Srivastava

Sanuj Srivastava

Sanuj Srivastava born on January 19th, 1996 in INDIA. He started to love Water at the age of 13 and his friends named him "Gold fish", He graduated in Bachelor of science in Physics, Chemistry and Mathematics in 2016. He is a passionate learner and a student who also happens …

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